4.15 करोड़ रुपए गबन के मामले में बैंक मैंनेजर और स्टाफ के खिलाफ एफआईआर
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सुनगढी थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट

पीलीभीत. भारत के बैंकों से 58 हजार करोड़ रुपए लेकर अब तक 15 लोग विदेश में भाग चुके हैं इनमें प्रमुख रूप से किंगफिशर एयरलाइंस के विजय माल्या, नीरव मोदी (पीएनबी घोटाला), मेहुल चोकसी (गीतांजलि जेम्स) और संदेसरा बंधु (नितिन और चेतन) आदि शामिल है. लेकिन उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में इसके ठीक विपरीत पंजाब एंड सिंध बैंक के मैनेजर और स्टाफ पर अमरिया के एक राइस मिल मालिक ने सीसी लिमिट खाते से 4 करोड़ 15 लाख 50 हजार रुपए धोखाधड़ी कर निकालने का आरोप लगाया है. इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सुनगढ़ी थाने में मैनेजर व स्टाफ के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मुकदमे की विवेचना शुरू कर दी है. सदर कोतवाली क्षेत्र की केजीएन टू कालोनी निवासी मो जीशान 47 वर्ष पुत्र मो उसमान ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायलय में विविध वाद सं./2026 प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 173 (4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 दाखिल कर कहा कि प्रार्थी मैसर्स उजैफा एग्रीटेक राईस मिल स्थित डयूनीडाम अमरिया रोड़ ग्राम उदयपुरमाफी तहसील अमरिया जिला पीलीभीत का स्वामी व प्रोप्राइटर है। उजैफा एग्रीटेक राईस मिल का जीएसटी पंजीकृत संख्या 09AMRPJ9203F2ZS है। प्रार्थी की फर्म उजैफा एग्रीटेक राईस मिल का कैश लिमिट शाखा पंजाब एण्ड सिंध बैक स्थित टनकपुर बाईपास रोड़ निकट चौराहा डिग्री कालेज थाना सुनगढ़ी शहर व जिला पीलीभीत मे बैंक खाता से 02541600050675 का खाता धारक है। जिसका संचालन उसके द्वारा किया जाता है। उसको बैंक द्वारा माह जून सन 2024 को 10 करोड का ऋण स्वीकृत किया गया। यह कि पूर्व में प्रार्थी के राईस मिल कारोबार का ऋण खाता इडियन बैंक शहर व जिला पीलीभीत में चल रहा था।
लेकिन टनकपुर रोड स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक के शाखा प्रबंधक राधेश्याम प्रभाकर ने उसको उकसातें व आकर्षक करते हुए उससे इण्डियन बैंक शाखा का ऋण बैंक खाता बन्द करके अपने बैंक शाखा पंजाब एण्ड सिंध बैंक पीलीभीत में खाता खोलने हेतु उकसाया/दबाव डाला,आरोप है कि बिना पूर्ण औपचारिकताओं के, बिना इण्डियन बैंक एनओसी के तथा बिना टेक ओवर प्रक्रिया पूर्ण किये ही 10 करोड़ का ऋण उसकी फर्म राईस मिल उजैफा एग्रीटेंक के नाम स्वीकृत किया। बाद में माह मार्च 2025 को उक्त ऋण को बढ़ाकर 15 करोड़ रूपये कर दिया। माह फरवरी सन 2025 में राधेश्याम प्रभाकर ने उसको लालच देकर उकसाया व प्रेरित किया व विश्वास जताया, उसके खाते ऋण की लिमिट को 25 करोड़ तक बढ़ाने व ऋण बैंक सुविधा देने का वचन दिया। राधेश्याम प्रभाकर शाखा प्रबंधक ने ऋण लिमिट बढ़ाने की सुविधा व सिक्योरिटी का बहाना करते हुये, उससे समय समय पर दिनांक 06 मई 2025 से 23 जनवरी 2026 उसके मोबाइल न. 9758550334 के व्हाट्सऐप के माध्यम से खाते के चैक विभिन्न धनराशियों के अभियुक्त ने अपने मोबाइल न. 8400979711 पर मंगवाये, व भेजने को कहा, तभी प्रार्थी ने अपने मोबाइल व्हाट्सऐप से अभियुक्त के मोबाइल व्हाटसऐप पर विभिन्न धनराशियों के 20 चैक के फोटो विभिन्न धनराशियों को बिना हस्ताक्षरित भेज दिए. जो
4,15,50000/ रुपये अभियुक्त ने उसके खाते से निकाल लिये। आरोप है कि अभियुक्त राधेश्याम प्रभाकर ने अपने बैंक कर्मचारियों व किन्ही अन्य व्यक्तियों के साथ मिली भगत, साज धाज करके मिथ्या व फर्जी दस्तावेज रचित कर उसके उपरोक्त बैंक खाते से व्हाट्सऐप पर भेजे गये थे । उपरोक्त चैंको की छायाप्रतियों में अंकित धनराशियों को बिना सहमति से नकद निकाल लिया। उसे व उसके किसी एजेन्ट ने बैंक से उक्त धनराशि प्राप्त नहीं की है। इस तरह उसके बैंक खाते से कुल 4,15,50000/ रुपये को नकद निकाल कर उसकी राइस मिल को नुकसान पहुंचाया। इस तरह अभियुक्त ने दोनो बैंक खाते से लगभग 4,15,50000 / रुपये निकाल कर धोखाधड़ी की है, उसकी सरकारी बैंक धनराशि का दुरूपयोग व दुर्विनियोग किया व नुकसान पहुंचाया। जबकि अभियुक्त राधेश्याम प्रभाकर बैंक शाखा प्रबंधक जनता/ग्राहको बैंक खाता धारको की धनराशि का कस्टोडियन है। जिसने बेईमानी करके नुकसान पहुंचाया। जिसकी जानकारी उसको होने पर उसने राधेश्याम प्रभाकर के पास जाकर शिकायत की, व बैंक के उच्चाधिकारियों को एक लिखित शिकायत भेजी, तो राधेश्याम प्रभाकर ने विश्वास जताते हुये उसको लालच दिया, कि कुछ दिन चुप रहे वह अभियुक्त की धनराशि को लाभ सहित वापिस उसके बैंक खाते में जमा कर देगा। उक्त धनराशियों के असल चैक उसके पास है। उसने बैंक को उपरोक्त धनराशियों के चैको को जारी नहीं किया। उक्त चैक व नकद धनराशि वसूल नहीं की, उक्त धनराशि को ट्रांसफर की अनुमति नहीं दी, हस्ताक्षर नहीं किये, उसने बैंक में आवेदन देकर उक्त चैकों की प्रतियां जो असल प्रार्थी के पास है। वाउचर, ट्रांजैक्शन, डिटेल व अन्य दस्तावेज व बैंक रिकार्ड की मांग की, तो अभियुक्त राधेश्याम प्रभाकर व उसके अधीनस्थ बैंक कर्मचारियों ने प्रार्थी को उक्त धनराशि की निकासी से सम्बन्धित उपरोक्त कागजातों को दिखाने से इंकार कर दिया. दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में सुनगढ़ी पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए. जिस पर बीती रात पंजाब एंड सिंध बैंक के शाखा प्रबंधक राधेश्याम प्रभाकर व अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों व अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 316(5) 338,336(3) 340(2) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है मुकदमें की विवेचना निरीक्षक हर सिंह पाल को सौंपी गई है. इधर बैंक शाखा प्रबंधक राधेश्याम प्रभाकर ने इन आरोपों से इनकार किया है, उनका कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप फर्जी व बेबुनियाद हैं.जांच चल रही है, जांच के बाद सही तस्वीर सामने आएगी.




