‘नायक’ अंदाज में अस्पताल पहुंचे नए प्राचार्य, सरकारी गाड़ी 300 मीटर पहले रुकवाई, लाइन में लगकर बनवाया पर्चा
पहले खुद बने आम मरीज, फिर अस्पताल की हकीकत देखी; रिश्वत, लापरवाही और अव्यवस्था पर सख्त संदेश

सुमित सक्सेना, पीलीभीत✍️
गुरुवार की सुबह जिला अस्पताल में सब कुछ सामान्य था। मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, कर्मचारी रोजमर्रा की तरह काम में लगे थे। तभी परिसर से करीब 300 मीटर पहले एक सरकारी गाड़ी रुकती है। गाड़ी से उतरते हैं मेडिकल कॉलेज के नवागत प्राचार्य डॉ. अमित कुमार। किसी औपचारिक स्वागत या अधिकारियों की भीड़ के बिना वह पैदल अस्पताल की ओर बढ़ जाते हैं।
अस्पताल पहुंचते ही उन्होंने सीधे पर्चा काउंटर का रुख किया। किसी विशेष सुविधा का उपयोग नहीं किया, बल्कि आम मरीजों की तरह लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया। जब पर्चा बनवाने के लिए उन्होंने 10 रुपये का नोट दिया तो कर्मचारी ने केवल 5 रुपये वापस किए। डॉ. अमित कुमार ने तत्काल कर्मचारी को बुलाकर व्यवस्था के अनुरूप शुल्क लेने और सही राशि लौटाने की सीख दी। यहीं से अस्पताल के पहले औचक निरीक्षण की शुरुआत हुई।
इसके बाद प्राचार्य एक-एक विभाग में पहुंचे। अल्ट्रासाउंड कक्ष, एक्स-रे, जनरल मेडिसिन ओपीडी, दवा वितरण केंद्र, पैथोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर, 200 बेड अस्पताल और महिला अस्पताल के लेबर रूम तक उन्होंने हर व्यवस्था को बारीकी से देखा।
एक्स-रे मशीन बंद मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और तत्काल उसे चालू कराने के निर्देश दिए। ऑपरेशन थिएटर में जब उन्हें मरीज की फटी हुई फाइल दिखाई गई तो उन्होंने रिकॉर्ड के रखरखाव पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और अभिलेखों को मानक के अनुरूप रखने के निर्देश दिए।
“अब शिकायत आई तो कोई नहीं बचाएगा”
महिला अस्पताल में उनका सबसे सख्त संदेश सुनाई दिया। लेबर रूम में मौजूद चिकित्सकों और कर्मचारियों से उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में रिश्वतखोरी या लापरवाही की लिखित शिकायत मिली तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर तक दर्ज कराई जाएगी।
ड्यूटी में लापरवाही नहीं चलेगी
ओपीडी का निरीक्षण करते हुए उन्होंने चिकित्सकों को समय से ड्यूटी करने और पूरे समय मरीजों को सेवाएं देने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि संबंधित विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर ओपीडी के दौरान अनिवार्य रूप से मौजूद रहें।
सुरक्षा व्यवस्था भी परखी
निरीक्षण के दौरान उन्होंने सुरक्षा कर्मियों के साथ अस्पताल परिसर का जायजा लिया और खुले रास्तों को बाउंड्रीवाल से बंद कराने के निर्देश दिए। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुस्तैदी से ड्यूटी करने को कहा।
निरीक्षण से मचा हड़कंप
अचानक हुए इस निरीक्षण की सूचना मिलते ही अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों के बीच हलचल मच गई। कई विभागों में व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त की जाने लगीं और कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थलों पर सक्रिय दिखाई दिए।
आज जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया। पर्चा काउंटर, साफ-सफाई और रखरखाव में कुछ कमियां मिली हैं, जिन्हें सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। सभी कर्मचारी सरकार की मंशा के अनुरूप जनहित में कार्य करें। यदि इसके बाद भी किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन सख्त कार्रवाई करने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा।”
— डॉ. अमित कुमार, प्राचार्य




