एक फोन कॉल से बदल गया निर्णय, डॉ. नितिन मलिक की तत्परता से बची ट्रक ड्राइवर की जान
रेफर करने की तैयारी थी, तभी असिस्टेंट प्रोफेसर ने फोटो देखकर कहा — “इलाज यहीं होगा”

रिपोर्ट- सुमित सक्सेना, पीलीभीत।
पीलीभीत में टनकपुर रोड पर बुधवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे ट्रक चालक को मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने अपनी संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और जिम्मेदारी के बल पर नई जिंदगी दे दी। गंभीर हालत में पहुंचे चालक को जहां रेफर करने की तैयारी चल रही थी, वहीं एक चिकित्सक के निर्णायक कदम ने पूरी कहानी बदल दी।

अलीगढ़ जनपद के हरदुआगंज थाना क्षेत्र स्थित ग्राम भीमगढ़ी निवासी 28 वर्षीय सुनील कुमार पुत्र लक्ष्मी नारायण ट्रक चालक है। बुधवार सुबह टनकपुर रोड पर ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल के पास ईंटों से लदी ट्रॉली और ट्रक की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और लोहे का एंगिल चालक सुनील के पैर के आर-पार हो गया।

मौके पर अफरा-तफरी मच गई। काफी मशक्कत के बाद गैस कटर से केबिन काटकर घायल चालक बाहर निकाला जा सका। हालत नाजुक होने पर उसे स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। इमरजेंसी में घायल की गंभीर स्थिति देखकर जनरल सर्जरी विभाग के सीनियर रेजिडेंट ने उसे हायर सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया।
इसी दौरान संयोगवश चिकित्सक का फोन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नितिन मलिक को लग गया, जो अस्पताल पहुंचने के लिए रास्ते में थे। बातचीत के दौरान डॉ. नितिन ने घायल की तस्वीर मंगाई। तस्वीर देखते ही उन्होंने बिना देर किए ऑपरेशन थिएटर तैयार करने के निर्देश दिए और साफ कहा— “मरीज का इलाज यहीं होगा।”
करीब आधे घंटे में अस्पताल पहुंचे डॉ. नितिन मलिक सीधे घायल के पास पहुंचे। तब तक मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी। उसकी पल्स कमजोर पड़ने लगी थी और ब्लड प्रेशर तेजी से गिर रहा था। डॉक्टरों ने तत्काल प्रयास कर किसी तरह मरीज को होश में लाया।
होश में आते ही सबसे पहले मरीज से उसके पिता का मोबाइल नंबर पूछा गया। समय की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने बिना औपचारिक देरी किए फोन पर ही अलीगढ़ में मौजूद पिता को पूरी स्थिति समझाकर ऑपरेशन की सहमति (कंसेंट) ली। अक्सर कागजी प्रक्रिया और कंसेंट में देरी के कारण गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित हो जाता है, लेकिन यहां डॉक्टरों ने मानवीय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी।
कंसेंट मिलते ही ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। डॉक्टरों की टीम ने कई घंटे तक कड़ी मशक्कत कर पैर में धंसे लोहे के सरिए को निकाला और सफल सर्जरी को अंजाम दिया। आखिरकार मौत से लड़ रहे ट्रक चालक की जान बचा ली गई। फिलहाल सुनील कुमार आईसीयू में भर्ती है और होश में आने के बाद बातचीत भी कर रहा है। उसके परिजन देर शाम अलीगढ़ से पहुंचे व चिकित्सकों का आभार प्रकट किया।
ऑपरेशन टीम में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नितिन मलिक के अलावा सीनियर रेजिडेंट डॉ. उत्कर्ष, जूनियर रेजिडेंट डॉ. अंकित, डॉ. अजय, एनेस्थेटिस्ट डॉ. राजन और ओटी स्टाफ शामिल रहा। प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने सफल ऑपरेशन कर जान बचाने वाली पूरी टीम को बधाई दी।
हालांकि यदि मरीज को दूसरे शहर रेफर किया जाता तो रास्ते में ही उसकी मौत होने की आशंका काफी अधिक थी। ऐसे में डॉ. नितिन मलिक का त्वरित निर्णय, जोखिम उठाने का साहस और समय पर किया गया इलाज ही मरीज के लिए जीवनदान साबित हुआ।



