टॉप न्यूज़देशयुवायूपीराज्यलोकल न्यूज़

टॉपर्स टॉक: 104 वर्षों बाद बदला रामा इंटर कॉलेज का इतिहास, मजदूरों के बच्चों ने रचा कीर्तिमान

कहानी सिर्फ टॉप करने की नहीं, बल्कि अभावों के बीच सपने जिंदा रखने की

बिना कोचिंग, केवल स्वाध्याय से प्रांजल और अक्षरा बने टॉपर

रिपोर्ट- सुमित सक्सेना

जब इरादे मजबूत हों, तो गरीबी भी रास्ता नहीं रोक पाती। यह सच कर दिखाया हाईस्कूल की टॉपर्स सूची में शामिल प्रांजल व अक्षरा ने। पीलीभीत के सनातन धर्म बांके बिहारी राम इंटर कॉलेज ने इस बार यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में ऐसा इतिहास रचा, जिसने हर किसी को चकित कर दिया। स्थापना के 104 वर्षों बाद पहली बार इस विद्यालय से टॉपर्स निकले और वह भी ऐसे परिवारों से, जहां रोज़ की रोटी के लिए मेहनत-मजदूरी करनी पड़ती है। यह कहानी सिर्फ टॉप करने की नहीं, बल्कि उन सपनों की है जो अभावों के बीच भी जिंदा रहते हैं… और एक दिन इतिहास बन जाते हैं।

हाईस्कूल के परिणाम में शीर्ष तीन स्थानों में से दो छात्र-छात्राएं इसी विद्यालय के रहे, लेकिन इस सफलता की सबसे अहम बात यह रही कि दोनों टॉपर्स के पिता मजदूर हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और बच्चों ने भी अपने माता-पिता के सपनों को हकीकत में बदल दिया।

प्रांजल: संघर्ष से सफलता तक का सफर

नौगवां निवासी अशोक कुमार मौर्य व शशि मौर्य के बेटे प्रांजल मौर्य ने 600 में से 566 अंक हासिल कर जिले में संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। हिंदी में 96, अंग्रेजी में 90, गणित में 93, विज्ञान में 94, सामाजिक विज्ञान में 95 और संस्कृत में 98 अंक लाकर प्रांजल ने यह साबित कर दिया कि मेहनत ही असली ताकत है। परिणाम घोषित होते ही घर में खुशी का माहौल छा गया। माता-पिता की आंखों में गर्व के आंसू थे, तो मोहल्ले में जश्न जैसा माहौल। फूल-मालाओं से स्वागत हुआ और मिठाइयों से मुंह मीठा कराया गया।

हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में टॉप करने के बाद फूल-मालाएं पहनाकर प्रांजल का स्वागत करते परिजन

यूपी न्यूज नेटवर्क 24 से बातचीत में प्रांजल ने बताया कि उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। स्कूल के बाद ‘ज्ञानोदय के गुरुजी’ ऐप से ऑनलाइन पढ़ाई की और धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई का समय 2-3 घंटे से बढ़ाकर 11-12 घंटे तक कर दिया। गणित उनका पसंदीदा विषय है और आगे चलकर वह सिविल सेवा में देश की सेवा करना चाहते हैं।

अक्षरा: NCERT बनी सफलता की कुंजी

बरहा की रहने वाली अक्षरा ने भी अपनी मेहनत से जिले में तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने 600 में से 564 अंक प्राप्त किए। हिंदी में 94, अंग्रेजी में 98, गणित में 98, विज्ञान में 92, सामाजिक विज्ञान में 88 और कला में 94 अंक हासिल कर विद्यालय व परिवार का मान बढ़ाया।

जिले में तीसरा स्थान हासिल करने पर अक्षरा का मुंह मीठा कराते माता-पिता

चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी अक्षरा के पिता मोहम्मद इक़बाल खान भी मजदूरी करते हैं। माता गुलशन गृहणी हैं। अक्षरा ने कक्षा 8 तक की बेसिक शिक्षा परिषद के कंपोजिट विद्यालय बरहा से पूरी की। इसके बाद रामा इंटर कॉलेज में एडमिशन लिया। अक्षरा ने पढ़ाई के लिए किसी कोचिंग या रेफरेंस बुक का सहारा लिए बिना केवल NCERT किताबों को अपना हथियार बनाया। परीक्षा से पहले उन्होंने मॉडल पेपर हल कर अपनी गलतियों को सुधारा और तैयारी को मजबूत किया। अक्षरा अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और अपनी शिक्षिका प्रेमवती गंगवार को देती हैं। गणित में रुचि रखने वाली अक्षरा भी आगे चलकर सिविल सेवा में जाना चाहती हैं।

विद्यालय बना सफलता की प्रयोगशाला

दोनों टॉपर्स ने अपनी सफलता में विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार गंगवार और शिक्षकों की भूमिका को बेहद अहम बताया। प्रधानाचार्य ने सिर्फ प्रशासनिक भूमिका ही नहीं निभाई, बल्कि खुद बच्चों के साथ मेहनत की। रविवार जैसे अवकाश के दिनों में भी बोर्ड परीक्षार्थियों को स्कूल बुलाकर मॉडल पेपर हल करवाना, उनकी शंकाओं का समाधान करना। ये प्रयास ही इस ऐतिहासिक सफलता की नींव बने।

यह भी पढ़ें-

यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम: हाईस्कूल में चमके प्रांजल, यश व युवराज; इंटरमीडिएट में दर्शिका ने किया टॉप https://upnewsnetwork24.in/2026/04/pranjal-yash-and-yuvraj-excelled-in-the-high-school-exams-while-darshika-sharma-topped-the-intermediate/

टॉपर टॉक: नंबर वन आने का पूरा भरोसा था, रात में 2 बजे तक की पढ़ाई https://upnewsnetwork24.in/2026/04/topper-talk-i-was-fully-confident-of-securing-first-rank/

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!