भाजपा जिला कार्यालय में भिड़े दो पदाधिकारी : तीखी नोकझोंक के बाद मारपीट की नौबत
जिलाध्यक्ष ने दी चेतावनी, सुधार के निर्देश
पीलीभीत। अनुशासन और “पार्टी विद ए डिफरेंस” का दावा करने वाली सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला कार्यालय में मंगलवार को हुई एक बैठक के दौरान अनुशासन की धज्जियां उड़ गईं। बैठक के दौरान पार्टी के दो बेहद प्रमुख पदाधिकारी किसी बात को लेकर आपस में भिड़ गए। दोनों नेताओं के बीच विवाद इस कदर बढ़ा कि बात गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गई। दोनों ही पदाधिकारी पूरनपुर तहसील क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं. सत्ताधारी दल के कार्यालय के भीतर इस तरह की हाई-प्रोफाइल भिड़ंत के बाद वहां मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बैठक की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों वरिष्ठ नेताओं में किसी पुराने या तात्कालिक मुद्दे को लेकर कहासुनी शुरू हुई। देखते ही देखते दोनों ने मर्यादाओं को ताक पर रख दिया और एक-दूसरे के साथ तीखा वाद-विवाद करने लगे। मामला शांत होने के बजाय इतना गरमा गया कि दोनों के बीच मारपीट की नौबत आ गई। बीच-बचाव करने उतरे अन्य नेताओं के हस्तक्षेप के बाद दोनों को अलग किया गया। इसके बाद जिलाध्यक्ष ने मामले को बिगड़ता देख दोनों ही पदाधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी। हालांकि जैसा कि अक्सर राजनीतिक गलियारों में होता है, जिलाध्यक्ष की डांट और डैमेज कंट्रोल की कोशिशों के बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर माफी मांग ली और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया।
वैसे पीलीभीत भाजपा कार्यालय में इस तरह की अंदरूनी कलह और गुटबाजी का सामने आना कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले साल 2022 में भी पार्टी के तत्कालीन जिला महामंत्री और एक जिला मंत्री के बीच ठीक इसी तरह की तीखी झड़प हुई थी। उस दौरान भी एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए कनिष्ठ पदाधिकारी को जमकर गालियां दी थीं, लेकिन तत्कालीन जिलाध्यक्ष ने उस गंभीर वाकये को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था और कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की थी। मंगलवार की इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सत्ताधारी दल के भीतर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।
पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी सियासत को करीब से जानने वाले कुछ नेताओं का दबी जुबान में यह भी कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम जिलाध्यक्ष के पर कतरने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। जिलाध्यक्ष को कमजोर साबित करने के लिए उनके सबसे करीबी और प्रिय पदाधिकारियों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। अब मौजूदा जिलाध्यक्ष इस पूरे अनुशासनहीनता के मामले में खुद कोई दंडात्मक कार्रवाई करेंगे या इसकी रिपोर्ट बनाकर प्रांतीय नेतृत्व और उच्च पदाधिकारियों को अवगत कराएंगे, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।
उधर जब इस हाई-वोल्टेज ड्रामे को लेकर मीडिया ने भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य से संपर्क किया तो उन्होंने कार्यालय के भीतर किसी भी प्रकार की मारपीट या हाथापाई की घटना से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने दबी जुबान में यह बात स्वीकार की कि दोनों पदाधिकारियों के बीच किसी विषय को लेकर तीखी कहासुनी और आंशिक नोकझोंक जरूर हुई थी। फिलहाल भले ही पार्टी के भीतर इस मामले को “सुलझा” लिया गया हो, लेकिन सत्ताधारी दल के दफ्तर में हुई इस गुटबाजी और सिर-फुटौवल की घटना पूरे जनपद की मीडिया और राजनीतिक हल्कों में जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है।
———–




