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योगी सरकार की स्थानांतरण नीति बनी मजाक, मुख्य उप परिवीक्षा अधिकारी का नौ साल बाद तबादला

अफसर अभी भी मेहरबान, नहीं कर रहे रिलीव

मुरादाबाद. साल 2017 से मुरादाबाद मंडल में मुख्य उप परिवीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात राजेश चंद्र का तबादला 30 मई 2026 को गोरखपुर हो गया वो अपना दशक पूरा करने से चूक गए है` लेकिन अफसरों की मेहरबानी से अभी तक उनकी रिलीविंग नहीं की गई है. उधर गोरखपुर से दिलीप कुमार को इसी पद पर मुरादाबाद भेजा गया है… मजे की बात यह है कि उनकी भी रिलीविंग नहीं हुई है. सूत्र बताते हैं कि राजेश चंद्र अपना पूरा प्रयास कर रहे हैं कि तबादला स्थगित हो जाए और वह मुरादाबाद ही रहें पर ऐसा होता दिख नहीं रहा उनका मुरादाबाद मंडल से क्या प्रेम है यह तो कोई नहीं जानता पर इतना जरूर है कि स्थानातरण नीति भी उनके आगे घुटने टेक गई है तभी तो एक ही मंडल में नौ साल का समय उन्होंने बिता दिया अब इसे काबिलियत कहें या कुछ और यह तो गहन अध्ययन का विषय है

जिला प्रोबेशन अधिकारी का कई बार मिला चार्ज….अपने नौ साल के कार्यकाल में कई बार उन्हें जिला प्रोबेशन अधिकारी के चार्ज मिले मतलब जिला प्रोबशन अधिकारी आते जाते रहे पर ज़नाब मुरादाबाद डटे रहे

शिकायत, जाँच और राजेश चंद्र की कार्यप्रणाली

राजेश चंद्र के खिलाफ तमाम शिकायतें हुईं जिनकी जाँच चलने की बात जानकारी में आई है वित्तीय अनियमितता से लेकर व्यक्तिगत द्वेष और अनुचित लाभ जैसे आरोप भी शामिल हैँ अब चुंकि जाँच पूरी नहीं हो पांई है इसलिए उन पर ये सब सिर्फ आरोप ही है

महापौर मुरादाबाद का सिफारिशी पत्र भी नहीं रोक सका राजेश चंद्र का तबादला आदेश

राजेश चंद्र को नौ साल के कार्यकाल के बाद ये आभास था कि वर्ष 2026 में तबादला होना स्वाभाविक सा है इसलिए पांच मई 2026 को एक सिफारिशी पत्र मुरादाबाद मेयर विनोद अग्रवाल के माध्यम से मंत्री बेबी रानी मौर्य को भिजवाया पर अफ़सोस 30 मई को आए तबादले के आदेश ने इस सिफारिशी पत्र को भी नाकाम कर दिया इस पत्र में लिखा था कि राजेश चंद्र का तबादला ना किया जाए

योगी सरकार की स्थानांतरण नीति बनी मजाक

उत्तर प्रदेश सरकार स्थानांतरण नीति को लेकर बेहद सख्त और पार्दर्शी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साफ आदेश हैँ कि कोई भी अधिकारी तीन वर्ष से अधिक किसी भी मंडल अथवा जिले में लगातार नहीं रहेगा पर इसके बावजूद इनकी तैनाती नौ साल तक चली

सरकारी फैसला भले ही राजेश चंद्र के मनमुताबिक ना हो पर इनका इतने आरोपों के बावजूद ट्रांसफर पॉलिसी को मात देते हुए आखिर राजेश चंद्र की वह कौन सी काबिलियत है जिसने नौ साल तक उन्हें मुरादाबाद में टिका कर रखा अगर इसकी भी जांच हो तो तमाम परतें उधड कर सामने आएंगी. @ up news

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