बिजनौर में आयुष्मान अस्पतालों पर साचीज का बुल्डोजर, 20 पर छापा, 18 पर गिरी गाज, पूरे प्रदेश में 220 अस्पताल बाहर
6 अस्पताल डि-एम्पैनल, 5 निलंबित, 5 का भुगतान रोका; फर्जी अस्पतालों पर शिकंजा अभियान

सुमित सक्सेना✍️
आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा, मानकों की अनदेखी और कागजों पर अस्पताल चलाने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने अब सबसे बड़ा अभियान छेड़ दिया है। स्टेट हेल्थ एजेंसी (SACHIS) की औचक कार्रवाई से निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। बिजनौर में 20 सूचीबद्ध अस्पतालों की जांच की गई, जिनमें 18 अस्पताल गंभीर अनियमितताओं में घिर गए। कार्रवाई इतनी बड़ी रही कि 6 अस्पतालों की सूचीबद्धता (De-Empanel) समाप्त कर दी गई, 5 अस्पताल निलंबित कर दिए गए, 5 अस्पतालों के क्लेम भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी गई, जबकि 2 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा (आईएएस) के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय टीम ने अस्पतालों का कमरा-दर-कमरा निरीक्षण किया। जांच में कई अस्पताल स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (STG) और गुणवत्ता मानकों का पालन करते नहीं मिले। सूत्रों के अनुसार, कई अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ नहीं मिला, विशेषज्ञ चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए और कई जगह केवल डिग्री के सहारे अस्पताल संचालित होते मिले। कुछ अस्पतालों की आधारभूत संरचना भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
सीएमओ को फिर से पंजीकरण जांचने के आदेश
निरीक्षण के बाद साचीज़ की ओर से सीएमओ बिजनौर को संबंधित अस्पतालों के पंजीकरण की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में कई अस्पताल ऐसे पाए गए, जो साचीज़ के मानकों के अनुसार सूचीबद्ध होने की पात्रता ही नहीं रखते थे। ऐसे मामलों में जुर्माना और अन्य कठोर कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है।
क्लेम पर भी शिकंजा, रिकवरी की तैयारी
साचीज़ ने केवल अस्पतालों पर ही नहीं, बल्कि क्लेम प्रक्रिया की निगरानी करने वाली आईएसए (Implementation Support Agency) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। संदिग्ध क्लेम सेटलमेंट को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं और गलत भुगतान की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। बताया जा रहा है कि अस्पतालों द्वारा क्लेम लेने के लिए एआई आधारित फोटो का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना बढ़ गई है।
दो महीने में 220 से अधिक अस्पताल बाहर
साचीज़ के अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीनों में प्रदेशभर में 220 से अधिक आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पतालों को डि-एम्पैनल किया जा चुका है। एजेंसी ने साफ कर दिया है कि जो अस्पताल योजना के गुणवत्ता मानकों, स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस और पारदर्शिता का पालन नहीं करेंगे, उन्हें आयुष्मान योजना से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
साचीज़ का स्पष्ट संदेश
स्टेट हेल्थ एजेंसी ने कहा है कि आयुष्मान भारत योजना गरीब मरीजों के उपचार के लिए है, न कि अनियमितताओं और फर्जी क्लेम का माध्यम बनने के लिए। प्रदेशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों की नियमित निगरानी, औचक निरीक्षण और कड़ी कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा। अब मानकों से समझौता करने वाले अस्पतालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।




