बीएसए कार्यालय में बदला नजारा: दिव्यांग बेटियों ने संभाली अफसर की कुर्सी, माता-पिता की आंखें हुईं नम
मीना और तारावती को मिला सम्मान, बीएसए रोशनी सिंह ने माला पहनाकर किया स्वागत; सपनों को मिली नई उड़ान

सुमित सक्सेना, पीलीभीत✍🏻
सरकारी दफ्तरों में अक्सर फाइलों और औपचारिक बैठकों का माहौल देखने को मिलता है, लेकिन बुधवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय का नजारा बिल्कुल अलग था। यहां दो नन्हीं दिव्यांग बेटियों के चेहरे पर मुस्कान थी, माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे और पूरे कार्यालय में तालियों की गूंज सुनाई दे रही थी। कुछ देर के लिए बीएसए की कुर्सी पर बैठीं इन बेटियों ने न सिर्फ अपना सपना जिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि हौसलों के आगे कोई भी शारीरिक चुनौती बड़ी नहीं होती।
बीएसए रोशनी सिंह ने विशेष पहल करते हुए दिव्यांग छात्राओं मीना और तारावती को कार्यालय आमंत्रित किया। दोनों छात्राओं का माला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया और उन्हें सम्मानस्वरूप उपहार भी भेंट किए गए। इसके बाद बीएसए ने अपनी कुर्सी पर बैठाकर उन्हें एक दिन के लिए अधिकारी बनने का अनूठा अनुभव कराया। जैसे ही दोनों बच्चियां अधिकारी की कुर्सी पर बैठीं, उनके चेहरे पर खिली मुस्कान पूरे माहौल को भावुक बना गई।
कार्यालय में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी इस अनोखे पल के साक्षी बने। सभी ने तालियां बजाकर बच्चियों का उत्साह बढ़ाया। बीएसए रोशनी सिंह ने दोनों छात्राओं से उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में बातचीत की। जब उन्होंने पूछा कि “बीएसए की कुर्सी पर बैठकर कैसा लग रहा है?” तो दोनों बच्चियों ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “बहुत अच्छा लग रहा है।” उनकी मासूम मुस्कान ने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल जीत लिया।

शहर के मोहल्ला सरफराज खान निवासी पप्पू की बेटी मीना, जो प्राथमिक विद्यालय भीमसेन ब्रजरानी में कक्षा चार की छात्रा हैं, अपनी मां ज्योति के साथ कार्यालय पहुंचीं। बेटी को अधिकारी की कुर्सी पर बैठा देखकर मां की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी बेटी के लिए जीवनभर की याद बन जाएगा और उससे उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ेगा।
इसी तरह अमरिया क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय उगनपुर की कक्षा दो की छात्रा तारावती अपने पिता वेद प्रकाश के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुईं। बेटी को बीएसए की कुर्सी पर बैठा देखकर पिता के चेहरे पर गर्व और संतोष की चमक साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे सम्मान बच्चों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा देते हैं।

बीएसए रोशनी सिंह ने कहा कि दिव्यांगता किसी भी बच्चे की प्रतिभा, क्षमता और सपनों के बीच कभी बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने दोनों छात्राओं को मन लगाकर पढ़ाई करने, आत्मविश्वास बनाए रखने और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया। यह पहल केवल दो बच्चियों को सम्मान देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि दिव्यांग बच्चों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और विश्वास की आवश्यकता है। जब उन्हें जिम्मेदारी और पहचान मिलती है तो उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई मिलती है।
कुछ ही मिनटों का यह अनुभव मीना और तारावती के लिए एक यादगार पल बन गया। उनकी मुस्कान, माता-पिता की नम आंखें और पूरे कार्यालय का उत्साह इस बात का प्रमाण था कि कभी-कभी एक छोटी-सी पहल किसी बच्चे के बड़े सपनों को नई उड़ान दे सकती है।



