डीएम का आदेश पांच ब्लॉकों में लागू, दो में बीएसए की अपनी सरकार!
सावन के अवकाश पर जिले में चला दोहरा राज, फिर गैरहाजिरी दिखाकर शिक्षकों का वेतन रोकने का फरमान

सुमित सक्सेना, पीलीभीत✍️
बेसिक शिक्षा विभाग में अनुशासन का पाठ पढ़ाने निकलीं बीएसए का नया आदेश खुद ही विभागीय अनुशासन और प्रशासनिक समन्वय की पोल खोल रहा है। एक तरफ 17 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी ने सावन के तीसरे सोमवार के मद्देनजर कक्षा एक से आठ तक के समस्त विद्यालयों का अवकाश घोषित कर दिया, वहीं दूसरी तरफ जिले के दो ब्लॉकों में एफएलएन प्रशिक्षण चलता रहा। अब प्रशिक्षण में कथित गैरहाजिरी के आधार पर शिक्षकों और शिक्षामित्रों का उस दिन का वेतन व मानदेय रोकने का फरमान जारी कर दिया गया है।

स्थिति ऐसी बन गई कि एक ही जिले में एक दिन दो व्यवस्थाएं चलती रहीं। सात ब्लॉकों में से मरौरी और पूरनपुर में प्रशिक्षण कराया गया, जबकि जिलाधिकारी के अवकाश आदेश के चलते शेष पांच ब्लॉकों में प्रशिक्षण नहीं हुआ। यानी डीएम का आदेश पांच ब्लॉकों में मान्य रहा और दो ब्लॉकों में प्रशिक्षण की अपनी अलग पटकथा चलती रही।

सूचना देर से पहुंची, अब सजा शिक्षकों को
शिक्षकों और शिक्षामित्रों का आरोप है कि प्रशिक्षण की सूचना समय से सभी तक नहीं पहुंची। सूचना बीआरसी के ग्रुपों में डाली गई, लेकिन एनपीआरसी स्तर के ग्रुपों तक पहुंचाने में देरी हुई। बीआरसी ग्रुपों में भी सभी शिक्षक और शिक्षामित्र जुड़े नहीं हैं। ऐसे में जिन तक सूचना समय से नहीं पहुंची, उन्हें भी गैरहाजिरों की सूची में शामिल कर दिया गया।
मामला यहीं नहीं रुका। कुछ शिक्षकों का आरोप है कि प्रशिक्षण दो बैचों में दो अलग-अलग कमरों में चल रहा था। कई शिक्षक दूसरे कक्ष में मौजूद थे, लेकिन उपस्थिति पंजिका की व्यवस्था ऐसी रही कि उन्हें भी अनुपस्थित दर्ज कर दिया गया। प्रशिक्षण स्थल पर मौजूद होकर भी गैरहाजिरी का तमगा मिल जाना विभागीय कार्यप्रणाली का एक और नमूना बन गया।
डीएम का अवकाश साइडलाइन, बीएसए का वेतन रोकने का फरमान ऑन लाइन
बीएसए के 17 अगस्त के आदेश में मरौरी बीआरसी पर निरीक्षण के दौरान 65 शिक्षक एवं शिक्षामित्र अनुपस्थित मिलने का उल्लेख करते हुए उनका एक दिन का वेतन/मानदेय रोकने की बात कही गई है। साथ ही दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अब पूरा मामला उस व्यवस्था पर सवालिया निशान छोड़ रहा है, जिसमें जिलाधिकारी का घोषित अवकाश एक ही जनपद के पांच ब्लॉकों में लागू हो जाता है और दो ब्लॉकों में प्रशिक्षण जारी रहता है। उसके बाद उसी कथित अनुपस्थिति को आधार बनाकर वेतन रोकने की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
हंसी-ठिठोली के बाद अब अनुशासन का डंडा
विडंबना यह भी है कि कुछ दिन पहले यही बीएसए एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर हंसी-ठिठोली करते हुए वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में रही थीं। जिलाधिकारी के गंभीर संबोधन के दौरान उनके व्यवहार पर लोगों ने सवाल उठाए थे। अब वही बीएसए शिक्षकों और शिक्षामित्रों को अनुशासन, उपस्थिति और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने निकली हैं।

लेकिन इस बार उनका अपना आदेश ही विभागीय तालमेल की तस्वीर सामने ला रहा है। जिले के पांच ब्लॉकों में डीएम के आदेश के मुताबिक अवकाश रहा, जबकि दो ब्लॉकों में प्रशिक्षण जारी और फिर गैरहाजिरी के नाम पर वेतन रोकने की कार्रवाई कर दी गई।
शिक्षकों में यह आशंका भी गहराने लगी है कि अब रोके गए वेतन और मानदेय को बहाल कराने के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर शुरू होंगे, जहां सौदेबाजी का खेल शुरू होगा। इसके लिए कई लूटमार गिरोह सक्रिय भी हो गए हैं। वाह रे बीएसए, क्या खूब व्यवस्था बनाई, अपनों को ही सजा दी, फिर अपनों से ही लुटाई..!!




