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आरटीआई कानून में पीलीभीत के अधिकारी फेल, 75 फीसदी मामलों में आयोग के हस्तक्षेप से मिली सूचना

राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की प्रेस वार्ता

पीलीभीत. राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने कहा कि प्रदेश में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई स्तरों पर गंभीर कमियां सामने आ रही हैं। पिछले दो वर्षों में जहां 50 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण किया गया है, वहीं 20 हजार से ज्यादा प्रकरण अब भी लंबित हैं।

पीलीभीत में विभागों के जन सूचना अधिकारियों (पीआईओ) के साथ आयोजित समीक्षा बैठक के बाद प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि आयोग में आए मामलों की केस हिस्ट्री का विश्लेषण करने पर यह सामने आया कि करीब 75 प्रतिशत मामलों में सूचना आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही जिलों से जानकारी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि संबंधित विभागों को समय से सूचना उपलब्ध करानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

समीक्षा बैठक में बड़ी संख्या में जन सूचना अधिकारियों की आरटीआई अधिनियम के प्रति जानकारी की कमी भी उजागर हुई। उन्होंने बताया कि बैठक में 100 से अधिक पीआईओ से अपील और शिकायत के बीच अंतर पूछा गया, लेकिन अधिकांश अधिकारी इसका सही उत्तर नहीं दे सके। वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश सूचना अधिकार अधिनियम में संशोधन किया गया था, इसके बावजूद वर्ष 2026 तक भी कई पीआईओ को इसकी जानकारी नहीं है।

बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि कई अधिकारी डीम्ड पीआईओ की अवधारणा तक स्पष्ट नहीं कर सके। सूचना के अंतरण (ट्रांसफर ऑफ इंफॉर्मेशन) के संबंध में भी अधिकांश अधिकारी अनभिज्ञ रहे और केवल दो अधिकारियों ने ही सही जानकारी दी।

जिले की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि पीलीभीत में इस समय 58 मामले लंबित हैं, जबकि अब तक 143 जन सूचना अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। समीक्षा के दौरान केस-टू-केस अध्ययन का प्रयास किया गया, लेकिन कई विभागों के पीआईओ बिना आवश्यक अभिलेखों के ही बैठक में पहुंचे, जिससे विस्तृत समीक्षा प्रभावित हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न विभागों की वेबसाइटों पर भी पर्याप्त सूचनाएं उपलब्ध नहीं हैं, जबकि अधिनियम के तहत कई सूचनाएं स्वप्रकाशन (सुओ मोटू डिस्क्लोजर) के अंतर्गत पहले से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है कि जन सूचना अधिकारी अधिनियम के प्रावधानों की समुचित जानकारी रखें और समयबद्ध तरीके से सूचनाएं उपलब्ध कराएं। @ सुमित सक्सेना

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