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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी ने पांच वर्ष का रिकार्ड खंगाला, तमाम गड़बड़ी मिली

मूल गहनों को गलाकर स्वरुप बदला गया

लखनऊ डेस्क. अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में जांच करने गई एसआईटी ने ट्रस्ट के गठन से अब तक के करीब पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, लेनदेन और ऑडिट दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को वित्तीय अनियमितताओं के साथ दान में मिले गहनों में भी गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। जांच में आशंका जताई जा रही है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए गहनों को गलाकर उनका मूल स्वरूप बदला गया और बाद में उनमें हेरफेर की गई। हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।एसआईटी दो दिवसीय दूसरे चरण की जांच पूरी कर शुक्रवार रात लखनऊ लौट गई। टीम ट्रस्ट के गठन से अब तक के करीब पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, लेनदेन और ऑडिट दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान ट्रस्ट के सभी प्रमुख वित्तीय दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए हैं। शुरुआती जांच में ऑडिट और वित्तीय लेनदेन में कई खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, दान की राशि में कथित हेरफेर गिनती के दौरान ही किए जाने की आशंका है, जिससे वास्तविक दान राशि और संभावित गबन का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।गहनों में गड़बड़ियां, बड़ों पर सवाल
लाखों-करोड़ों रुपये के कीमती गहने श्रद्धालुओं ने दान दिए हैं। कई दान देने वालों ने सवाल भी उठाए हैं। ऑडिट में भी इसका जिक्र नहीं है। एसआईटी इस पहलू को बहुत ही गंभीरता से जांच रही है। इसका पूरा काम चंपत राय के कहने पर टिन्नू देखता था। सूत्र बताते हैं कि गहनों को गलाया भी जाता था। अंदेशा है कि इसी के बाद कहीं न कहीं गलाए गए गहनों को इधर से उधर किया जाता था। एसआईटी को कुछ सुबूत व गवाह तो मिले हैं, लेकिन देखना यह होगा कि इसको वह साबित कैसे करेगी। अगर यह सही है तो इसमें भी चंपत राय की जिम्मेदारी तय होगी।

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