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मैगलगंज आ रहे हैं तो धनपाल मिष्ठान के गुलाब जामुन जरूर खाएं

आजादी से पहले क्रांतिकारियों को मुफ्त खिलाते थे गुलाब जामुन

यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के मैगलगंज कस्बे को लोग ‘गुलाब-जामुन का शहर’ भी कहते हैं हर दुकान की एक बात कॉमन है सभी पर लिखा है – मशहूर गुलाब-जामुन की दुकान

आजादी से 6 साल पहले तक यहां मिठाई की एक भी दुकान नहीं थी 1941 में मैगलगंज चौराहे पर छप्पर के नीचे श्यामलाल यज्ञसैनी ने गुलाब-जामुन की पहली दुकान खोली जो आज धनपाल मिष्ठान के नाम से है

उनके बारे में यहां एक किस्सा काफी चर्चित है श्यामलाल 1 रुपए के 16 गुलाब-जामुन बेचते थे लेकिन आजादी की लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारियों को मुफ्त में खिलाते थे

मैगलगंज के ज्यादातर दुकानों पर आपको ‘शुद्ध खोये से बने गुलाब-जामुन’ लिखा दिखेगा लेकिन असल ओरिजनल होने का अंदाजा आपको धनपाल मिष्ठान की दुकान पर लगी भीड़ से ही लग जाएगा

यहाँ से गुजरते हुए अचानक एक तेज़ मीठी सी ख़ुशबू हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती है जैसे ही उस तरफ नज़र जाती है एक बोर्ड टंगा दिखता है जिसपर लिखा है- “मैगलगंज में आपका स्वागत है गुलाब जामुन खाकर जाइएगा. यूपी न्यूज डेस्क.

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