भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटाने को लेकर मंथन, एसएसबी ने चलाया संयुक्त अभियान का प्रस्ताव
नो-मैन्स लैंड से लेकर 15 किमी तक अतिक्रमण हटाने के लिए वन, राजस्व और प्रशासन से मांगा समन्वय

पीलीभीत। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण और उसके प्रभावी निराकरण को लेकर गुरुवार को बरेली मंडल के आयुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व, वन विभाग और जिला प्रशासन के साथ संयुक्त अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में एसएसबी के महानिरीक्षक अमित कुमार (सीमांत मुख्यालय, रानीखेत), डीआईजी अनिल कुमार शर्मा (क्षेत्रक मुख्यालय, पीलीभीत) तथा 49वीं वाहिनी के कमांडेंट शेर सिंह चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
महानिरीक्षक अमित कुमार ने बताया कि गृह मंत्रालय समय-समय पर एसएसबी को भारत-नेपाल सीमा स्थित नो-मैन्स लैंड तथा सीमा से भारतीय क्षेत्र के 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने के निर्देश देता रहा है। उन्होंने कहा कि जिन सीमा स्तंभों का सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल द्वारा संयुक्त सत्यापन किया जा चुका है और जिन्हें सही पाया गया है, उन क्षेत्रों में भी नेपाली नागरिकों द्वारा नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण किए जाने के मामले सामने आए हैं।
एसएसबी ने जनपद पीलीभीत में 49वीं वाहिनी के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत वन एवं राजस्व विभाग की अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए संबंधित विभागों के साथ संयुक्त अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा। अधिकारियों ने कहा कि राजस्व विभाग, वन विभाग और एसएसबी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से ऐसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
बैठक में सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिक्रमण के मामलों में समन्वित कार्रवाई, नियमित निगरानी और विभागीय स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने पर भी चर्चा हुई।




