
✍️ सुमित सक्सेना, पीलीभीत।
ईंधन बचत को लेकर पीलीभीत प्रशासन की पहल अब केवल अपील तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन पर उतरती दिखाई देने लगी है। अपने एस्कॉर्ट वाहन को हटाने और अधिकारियों को ऑफिसर्स कॉलोनी से पैदल कलेक्ट्रेट आने के निर्देश देने के बाद अब जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने तहसील दिवस के लिए भी अनोखी व्यवस्था लागू की है।
शनिवार को तहसील अमरिया में आयोजित होने वाले तहसील दिवस में शामिल होने के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक विशेष बस की व्यवस्था की गई है। यह बस सुबह 9:30 बजे कलेक्ट्रेट परिसर से रवाना होगी और सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को लेकर अमरिया तहसील पहुंचेगी। तहसील दिवस समाप्त होने के बाद सभी अधिकारी इसी बस से वापस जिला मुख्यालय लौटेंगे।
सबसे खास बात यह है कि इस पूरे दल का नेतृत्व खुद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह करेंगे। डीएम भी अधिकारियों के साथ उसी बस में सफर करेंगे। उनके साथ पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारी एक साथ बस में बैठकर तहसील दिवस में शामिल होने जाएंगे। प्रशासनिक गलियारों में इस पहल की व्यापक चर्चा है। इसे सादगी के साथ जिम्मेदारी निभाने का उदाहरण माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि सभी अफसर अलग-अलग सरकारी और निजी वाहनों से अमरिया जाते, तो करीब 40 से 50 वाहनों का इस्तेमाल होता। ऐसे में बस व्यवस्था से बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल की बचत होगी।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और संभावित ईंधन संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचत की अपील की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सरकारी विभागों में फ्लीट और एस्कॉर्ट वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए थे। उसी क्रम में पीलीभीत प्रशासन लगातार व्यवहारिक कदम उठा रहा है।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह पहले ही अपने एस्कॉर्ट में लगने वाला वाहन हटाने का निर्णय ले चुके हैं। साथ ही ऑफिसर्स कॉलोनी में रहने वाले अधिकारियों को कलेक्ट्रेट और विकास भवन तक पैदल आने-जाने के लिए प्रेरित किया गया है। अब बस से सामूहिक रूप से तहसील दिवस में जाने का निर्णय इस अभियान को और प्रभावी बना रहा है।
जिले में आम लोगों के बीच भी डीएम की इस पहल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग इसे केवल सरकारी आदेश नहीं, बल्कि नेतृत्व द्वारा पेश किया गया व्यवहारिक उदाहरण मान रहे हैं, जहां अधिकारी खुद सादगी और संसाधन बचत का संदेश देते नजर आ रहे हैं।




