फॉलोअप: 24 घंटे में बैकफुट पर आईं बीएसए, वेतन रोकने का आदेश वापस लेने का सिर्फ आश्वासन, लिखित आदेश का इंतजार
सुमित सक्सेना, पीलीभीत✍️
जिले में सावन अवकाश के दिन एफएलएन प्रशिक्षण में कथित अनुपस्थिति के आधार पर शिक्षकों और शिक्षामित्रों का वेतन रोकने के आदेश को लेकर मचा बवाल अब बेसिक शिक्षा विभाग पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। यूपी न्यूज़ नेटवर्क 24 पर 24 घंटे पहले प्रकाशित खबर के बाद यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर शिक्षक संगठनों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों और आम लोगों ने बीएसए के आदेश को गलत बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। मामला तूल पकड़ने के बाद आखिरकार बीएसए को बैकफुट पर आना पड़ा।

बुधवार सुबह बीएसए ने मरौरी ब्लॉक के प्रशिक्षणरत शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं शिक्षामित्रों को अपने चैंबर में बुलाकर वार्ता की। इस दौरान उन्होंने वेतन कटौती संबंधी आदेश वापस लेने का मौखिक आश्वासन दिया। हालांकि बैठक में मौजूद शिक्षकों का कहना है कि उन्हें केवल भरोसा दिया गया, लेकिन आदेश निरस्त करने संबंधी कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया।

दिनभर आदेश का इंतजार, विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म
बीएसए के मौखिक आश्वासन के बाद प्रभावित शिक्षक पूरे दिन नए आदेश का इंतजार करते रहे, लेकिन देर शाम तक विभाग की ओर से वेतन रोकने संबंधी आदेश वापस लेने का कोई लिखित पत्र जारी नहीं किया गया। इससे शिक्षकों की चिंता बरकरार रही। विभागीय कार्यालयों में भी दिनभर इसी मामले की चर्चा होती रही कि आखिर आदेश कब वापस होगा और क्या सभी प्रभावित शिक्षकों का वेतन बिना किसी शर्त के बहाल किया जाएगा।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब जिलाधिकारी द्वारा 17 अगस्त 2026 को सावन माह के तीसरे सोमवार के मद्देनजर जनपद में अवकाश घोषित किया गया था, तब उसी दिन प्रशिक्षण कराकर अनुपस्थिति के आधार पर वेतन रोकना प्रशासनिक समन्वय की गंभीर विफलता है। वह भी इस स्थिति में जब सात में से पाँच ब्लॉक में अवकाश के चलते प्रशिक्षण नहीं कराया गया।उनका कहना है कि यदि विभाग अपनी गलती स्वीकार कर चुका है तो केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। आदेश को तत्काल लिखित रूप से निरस्त कर सभी प्रभावित शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों का वेतन निर्बाध जारी किया जाना चाहिए।

लिखित आदेश नहीं, इसलिए संशय कायम
फिलहाल स्थिति यह है कि बीएसए ने भले ही बातचीत में आदेश वापस लेने का भरोसा दिया हो, लेकिन जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक वेतन रोकने का पूर्व आदेश प्रभावी माना जाएगा। ऐसे में प्रभावित शिक्षक अभी भी असमंजस में हैं और विभाग के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।




