बरेली से ‘ब्रेन डेड’ बताकर घर ला रहे थे परिजन, रास्ते में झटके के साथ लौट आई सांस
कुदरत का करिश्मा

सुमित सक्सेना,पीलीभीत। कुदरत के खेल भी निराले हैं। कभी पल भर में जिंदगी छीन लेती है, तो कभी मौत के मुहाने से ही जीवन लौटा देती है। कहते हैं जीवन और मृत्यु की डोर यमराज के हाथ में होती है, लेकिन कभी-कभी किस्मत ऐसी करवट लेती है कि इंसान यमराज के मुंह से भी अपनी सांसें छीनकर वापस आ जाता है।
पीलीभीत में ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है, जहां मौत की दहलीज तक पहुंच चुकी एक महिला की जिंदगी ने ऐसा पलटा खाया कि हर कोई हैरान रह गया। डॉक्टरों ने जब उसकी आंखों की पुतलियां फैल जाने और शरीर में कोई हरकत न होने पर उसे लगभग मृत मानते हुए घर ले जाने की सलाह दे दी, तो परिवार ने भी अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। आज वही महिला पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटने जा रही है। घटना को सुनने वाला हर शख्स इसे कुदरत का करिश्मा और जीवन की अदम्य जिजीविषा मान रहा है।
जिला न्यायालय के नकल विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात विनीता शुक्ला को मानो नया जीवन मिला है। बीते 22 फरवरी की शाम विनीता घर के कामकाज में लगी थीं। अचानक वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। घबराए परिजन तुरंत उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बरेली रेफर कर दिया।
बरेली के एक निजी अस्पताल में विनीता को वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। दो दिन तक वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। चिकित्सकों ने आंखों की पुतलियां फैल जाने और शरीर में प्रतिक्रिया न होने के आधार पर परिजनों को घर ले जाने की सलाह दे दी। यह सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन विनीता को एम्बुलेंस से पीलीभीत लेकर लौट रहे थे। उधर घर में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। जिला न्यायालय परिसर में भी शोक की लहर दौड़ गई थी।
…लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था
परिजनों के मुताबिक जब एम्बुलेंस रिठौरा के पास पहुंची, तभी सड़क के एक गड्ढे में गाड़ी जाने से तेज झटका लगा। उसी क्षण दो दिनों से निष्क्रिय पड़ी विनीता के शरीर में हलचल हुई और उनकी सांसें लौट आईं।
यह देखकर एम्बुलेंस में मौजूद परिजन हैरान रह गए। तुरंत उन्हें पीलीभीत के डॉ. राकेश न्यूरोसिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां बिना वेंटिलेटर के उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। करीब 13 दिन तक इलाज के बाद अब विनीता पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह खुद चल पा रही हैं और अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौट रही हैं।
स्नेक प्वाइजनिंग का शक, उसी आधार पर किया इलाज
न्यूरोसर्जन डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि जब विनीता को बरेली से डिस्चार्ज किया गया था, तब वह पूरी तरह पैरालिसिस जैसी स्थिति में थीं। उनका ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्स अनुपस्थित था। दिल की धड़कन चल रही थी, लेकिन वह अपनी सांसें नहीं ले पा रही थीं। आंखों की पुतलियां फैल चुकी थीं और उनका ग्लासगो कोमा स्केल मात्र तीन था, जबकि सामान्यतः यह 15 होता है।
24 फरवरी को अस्पताल में भर्ती करने के दौरान चिकित्सकों ने उनके पैरों पर दो दांत जैसे निशान देखे। इसके बाद विशेषज्ञों से परामर्श कर स्नेक प्वाइजनिंग की आशंका के आधार पर एंटी-वेनॉम इंजेक्शन दिए गए और अन्य सपोर्टिव उपचार शुरू किया गया।
डॉ. सिंह के मुताबिक 24 घंटे के भीतर ही शरीर में हलचल शुरू हो गई। इसके बाद लगातार निगरानी में रखकर उपचार किया गया और अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।उन्होंने कहा कि यह घटना निश्चित रूप से चमत्कार जैसी प्रतीत होती है। हालांकि लक्षण पहचानकर उपचार देना भी महत्वपूर्ण रहा।
मानो जिंदगी के तीन दिन मिट गए
स्वस्थ होने के बाद विनीता शुक्ला ने बताया कि उनके और उनके परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। 2 टूक से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी याद नहीं कि वह कैसे बेहोश हुईं। ऐसा लगता है मानो उनकी जिंदगी से तीन दिन पूरी तरह गायब हो गए हों। विनीता ने बताया कि अब वह पूरी तरह ठीक हैं, खुद चल पा रही हैं, खाना खा रही हैं और लोगों से सामान्य बातचीत भी कर रही हैं।




