साक्ष्य के अभाव में अमित गुप्ता उर्फ चिंटू हत्याकांड में अटल वाल्मीकि समेत चार आरोपी दोष मुक्त
साढे 16 साल पहले हुई थी भाजपा के पूर्व विधायक बीके गुप्ता के भतीजे की हत्या
पीलीभीत। नगर में साढ़े 16 साल पहले हुए बहुचर्चित अमित गुप्ता उर्फ़ चिंटू हत्याकांड के चार आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट अनु सक्सेना ने दोष मुक्त कर दिया है। मामले के एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है।
इस मामले में सुमित गुप्ता ने थाना सुनगढी पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके अनुसार उसके भाई अमित गुप्ता उर्फ चिंटू को 8 मार्च 2008 को दोपहर बाद दो लोग उसके घर से बुलाकर ले गए ।एक आरोपी ने दो दिन बाद फोन किया कि उसके भाई की हत्या कर दी गई है और शव खेत में डाल दिया गया है। परिवारी जनों ने काफी तलाश की लेकिन वहां अमित गुप्ता उर्फ चिंटू का शव नहीं मिला ।बाद में बीसलपुर थाना क्षेत्र में खेत के किनारे जला हुआ शव बरामद हुआ।
इस मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद थाना जहानाबाद के गांव सैंजना निवासी घनश्याम, दूधिया मंदिर के निकट ज्ञान कॉलोनी निवासी द्वारिका प्रसाद, ग्राम बड़हरा निवासी अनिल कुमार उर्फ रिंकू ,बाग़गुलशेर खां निवासी अटल वाल्मीकि और अमर दास के विरुद्ध हत्या करने, हत्या करके शव गायब करने और गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले में राज्य सरकार की ओर से मृतक के भाई सुमित गुप्ता, सचिन गुप्ता, डॉक्टर केके शर्मा ,रितेश कुमार सहित कुल 14 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए ।बताते हैं कि इस मामले में घनश्याम पर मुख्य आरोप लगाए गए थे। घनश्याम का निधन हो गया। इस कारण न्यायालय के आदेश से घनश्याम की पत्रावली अन्य आरोपियों से अलग कर दी गई ।
मामले की सुनवाई के बाद साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए स्पेशल जज गैंगस्टर एक्ट अनु सक्सेना ने द्वारिका प्रसाद, अनिल कुमार उर्फ रिंकू ,अटल वाल्मीकि और अमरदास को उनके ऊपर लगाए गए आरोपों से दोष मुक्त कर दिया ।न्यायालय ने अभियुक्त गण को निर्देश दिया है कि वह निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील होने की दशा में, उच्च न्यायालय के समक्ष हाजिर होने हेतु 20 हजार रूपए का एक-एक व्यक्तिगत बंध पत्र और इसी धनराशि के दो दो जमानती न्यायालय में दाखिल करें।



